विश्व साइकिल दिवस: अनिल जैन

विधा-पद्य

जब चलना हम जाते सीख,
तब लगता चलने का हो साधन।
खुशी होती इस इच्छा हो पूरी,
जब लाते पापा दुपहियां साइकिल वाहन।
चलो साइकिल चलाते अब हम,
खेल व्यायाम इसे बनाते है।
साइकिल दिवस पर साइकिल अपनाओ,
आनन्द स्वस्थता पाओ कर साइकिल योग।
जहां चाहो वहां साइकिल ले जाओ,
चढ़ मित्रों संग कर खुशियां बातें।
चैम्पियन बनो साइकिल दौड़ कर,
दुनियां घूमों खुले आसमां दिन रातें।
आओ साइकिल दिवस मनाएं,
साइकिल खरीद नियम संग चला।
प्रदूषण मिटाये कम कर भीड़,
स्वस्थता बढा कर भविष्य भला।
अनिल जैन
स्वरचित-मौलिक

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