मोहिनी मंत्र चलाना
कोमल नाजुक चरण तेरे,
जमीं पर मत रखना।
पांवों में सजे महावर तेरे,
सही-सलामत रखना।।
रूनझुन बजती पायल तेरी,
मधुरम गीत सुनाती।
मेंहदी रचीं जो पांव में तेरी,
प्रेम रस बरसाती।।
सम्मान सदा बड़ों का करना,
बात कटु नहीं कहना।
कोई भी कितनों हो जाए बैरी,
पैर ठोकर न लगाना।।
लात का दानव बात नहीं माने,
फिर भी पैर न चलाना।
लिए प्रेम रस बरसाकर उसपर,
मोहिनी मंत्र चलाना।।
स्वरचित व मौलिक