दोस्ती कभी मिशाल होती थी: डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र‘आदित्य’

दोस्ती छाया दार वृक्ष होती है,
सुख शांति की औषधि होती है,
कैसे छोड़ सकते हैं, उसे जिसके
बिना हर महफ़िल अधूरी होती है।

दोस्ती कभी मिशाल होती थी,
अब बस स्वार्थ-सिद्धि होती है,
संभल कर करना, दोस्त दोस्ती,
दुनिया बहुत होशियार होती है।

भ्रष्टाचार, ग़रीबी, जातिभेद और
अशिक्षा, पाखंड, अन्याय आदि से
जनता मुक्त हो, काश कुछ ऐसा हो,
जीवन में करने हेतु एक वृत ऐसा हो।

मानवता धर्म वृत जिसने रखा,
उसने सबमें पाया है प्यार सदा,
मानवता से बड़ा धर्म नहीं कोई,
इस वृत से सबका हो भला सदा।

समय के साथ बदलाव आते हैं,
ये बदलाव महसूस किये जाते हैं,
आदित्य समय बलवान होता है,
इसके साथ चलना हितकर होता है।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ

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