खूनी सिंदूर: अनिल राही


बेशरमी की हदें पार कर जो, अहंकार के मद में चूर।
ओ गीदड़ की औलादें सुन लो,खत्म नहीं खूनी सिंदूर।

पिटे हुए को क्या पीटना,नहीं है रीति हमारी
सर पर चढ़ कर जो बोले तो,मार पड़ेगी भारी
सबक सिखाया ऐसा तुझको,भूल गया वो मंजर
घर में घुसकर छाती में तेरे,खोंप दिए थे ख़ंजर ऐसी मार पड़ेगी तुझको,सुन मुल्ला लँगूर
ओ गीदड़ की औलादें सुन लो,खत्म नहीं खूनी सिंदूर

औकात नहीं तेरी मुल्लाओ ,जो हमसे टकराये
भेजे में उतरी जो गोली,फिर भी समझ न आये
गोला बारूदों ने तुझको,तहस,नहस,कर डाला
भीख कटोरा हाथ में लेकर,मांगे पेट निवाला
सभी ठिकाने तेरे हमसे, कहीं नहीं हैं दूर
ओ गीदड़ की औलादें सुन लो,खत्म नहीं खूनी
सिंदूर

खुंखारी कुत्तों के जैसे पाल रखे हैं,आतंकवादी
वही करेंगे चिथड़े तेरे,जन जन की होगी बर्बादी
तेरी रक्षा के सारे घेरे, ध्वस्त सभी कर डाले
बचे खुचे उनमें भी तूने, डाल दिये हैं ताले
सारे सिस्टम तेरे जिनमे,जंग लगी भरपूर
ओ गीदड़ की औलादें सुन लो,खत्म नहीं खूनी सिंदूर

बहुत सब्र किया था हमने,अब न तुझे छोड़ेंगे
जिन हाथों ने छोड़ी गोली,उनको अब तोड़ेंगे
कर के बहुत सफाया हमने,उन बहनों की खातिर
उनमे से जो बचकर भागे,खूनी गद्दारों के शातिर
हाथ जोड़ घुटनों पर तुझको,कर देंगे मजबूर,,
ओ गीदड़ की औलादें सुन लो,खत्म नहीं खूनी सिंदूर।


✍️अनिल राही
ग्वालियर मध्यप्रदेश
9425407523

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