कोप भवन
सजल नैनों की अनकही जज्बात सिसकियां लेतीं स्त्री से बोली
आधुनिकता की पहन चोला तलाशने की कुछ कोशिश आखिर क्यों करतीं अन्धकार की काली स्याही राज कैसा छुपा रही
ढूढे स्त्री मन दूख बांटने का एक कोना
सखी सुनो,
घूंट गुस्सा का पीना सीखों सर्वश्रेष्ठ हृदयँ मथना सीखों मर्यादाओं की छवि में बंध के व्यथित मन बहलाना सीखों
सृष्टि के सृजन में देखों
मिथिला के सिया के लिए
अवध के महलों में नहीं था कोई कोप भवन।
अभिलाषा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश गोरखपुर
अभिलाषा श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश गोरखपुर