आज की नारी क्यों हो बीचारी।
पर्वत की चोटी को सर
है वो करती।
सरहद पर चण्डी बनकर
वो लडती।
घर कि रसोई में
अन्न पूर्णा प्यारी। आज की
बन विज्ञानी ब्रह्माण्ड में घूमे
पाएलट बन धरती आकाश
को चूमें।
घर की शोभा जब करती बुहारी। आज की नारी
महापुरुष वीरों की माता
कहलाती।
चुभता जब कांटा तो
आंसू बहाती
मिहरबां दुआओं की ख़ान प्यारी। आज की नारी
नारी ने नारी को नीचा दिखाया
खून के रिश्तों में मतभेद करवाया।
घर की सुख शांति को
बाहर भगाया।
परिवार की एकता का नाश
कराया।
फूलों की बगिया बनी
कांटों की क्यारी।
मां बहन बेटी बन ममता लुटाती।बनकर पत्नी वो
वंश बढाती।
दोस्त बनें तो क़ुर्बान हो वारी।
नारी ही नारी की दुश्मन
बनी जब।
नारी ने नारी पर बंदूक
तनी जब।
प्रीत की बैरन हुई
दुखों की पिटारी। आज की नारी
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