पिता
पिता होता घर की शान,
इनके बिना घर सुनसान।
पिता से ही होती बच्चों की पहचान,
पिता रखता बच्चों का ध्यान।
मेहनत मज़दूरी करके बच्चों को खिलाता,
अपने सामर्थ्य से बढ़कर शिक्षा दिलाता।
उनकी हर इच्छा का रखता ध्यान,
उनपर करता सब कुछ कुर्बान।
एक पिता की कीमत वही जा पाए,
जो पिता का सानिध्य, प्रेम पाए
श्रीमती मंजू बाला शर्मा
अध्यापिका परलीका।
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पिता: श्रीमती मंजू बाला शर्मा
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