श्रीमती मंजू बाला शर्मा द्वारा रचित पंक्तियां
मुसाफिर
ए मुसाफिर चलता चल,
राह की तु चिंता ना कर।
राह ना आसान होगी,
कहीं कहीं सुनसान होगी।
कंकड़ पत्थर भी आएंगे,
पांवों में कांटे चुभ जाएंगे।
तुझे अकेले ही जाना होगा,
बड़ी दूर ठिकाना होगा।
रस्ता ना जाना पहचाना होगा,
उस पर बढ़ते ही जाना होगा।
ना तेरे कोई साथ होगा,
ना अपना कोई पास होगा।
जो थक हार कर बैठ जाते हैं,
वो मंजिल कभी नहीं पाते हैं।
समय अपना गंवाते हैं,
बाद में पछताते हैं।
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मुसाफिर: मंजू बाला
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