वादा: मुकेश सिंह “परिंदा”

उसने अपने दिल को बहुत समझाया होगा l
फिर तुमसे मिलने का वादा निभाया होगा ll (1)

बिछड़ने का गम सता रहा था उसको –
शायद इसलिए मिलन का मौका गवाया होगा ll (2)

टूट न जाये रिश्ते , कच्ची सड़कों की तरह-
कितना सोच सम्भल कर कदम को बढ़ाया होगा ll(3)

कितना तनहा था वो , इतना ना सह सका –
गाते परिंदों को बरगद से जब उड़ाया होगा ll(4)

जिद्द चाँद की समझाने के लिए “परिंदा “
रोते बच्चें को अपनी वफाई का किस्सा सुनाया होगाll(5)

संग्रह -🔹दिल की कस्तूरी से🔹l
रचनाकार – मुकेश सिंह “परिंदा”
बगही,चुनार, मिर्ज़ापुर, (यू. पी.)

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