भाई बहन के प्रेम का, त्यौहार है राखी।
सबसे पवित्र रिश्ते का, उपहार है राखी।।
रूठी बहन को मनाने, मनुहार है राखी।
चाहतों का बेझिझक, इजहार है राखी।।
बहना का भाई पर प्रीत, बौछार है राखी।
रेशम की डोरी में समाया, प्यार है राखी।।
पतले धागे में धरे शक्ति, अपार है राखी।
बहना की सदा रक्षा का, ले भार है राखी।।
एक दूजे से अटूट प्रेम का, उद्गार है राखी।
जोड़े जो दिलों को मजबूत, तार है राखी।।
सुख दुख इक दूजे का, सरोकार है राखी।
बना देता एक भाई को, जिम्मेदार है राखी।।
बहना का भैया पर, अधिकार है राखी ।
बांँधकर न लें पैसा, नहीं व्यापार है राखी।।
प्रीत की भीनी सुगंध भरी, बयार है राखी।
लाज बचाने बहन का, दारोमदार है राखी।।
गार्गी चटर्जी “आशा”
कोरबा, छत्तीसगढ़