शीर्षक:- मैं हूँ ना
मैं हूँ ना।
तू फ्रिक्र मत कर ,
मैं हूँ ना।
ये एक शब्द नहीं शक्ति है ।
ये एक शब्द नहीं ताकत है।।
हारे हुए के लिए हिम्मत है।
हारे हुए का ईज्जत है।।
बस किसी को किसी का ये कहना।
मैं हूँ ना। ।
गिरते हुए को बल मिलता है।
गिरे हुए को संबल मिलता है।।
ये एक शब्द नहीं है बहुत बड़ा खजाना।
मैं हूँ ना। ।
रचना मौलिक स्वरचित
महेन्द्र कुमार सिन्हा जय
महासमुंद छत्तीसगढ़