भारत भूमि।
भरत भूमि भारत देश दुलारा,
सदा रहे शिश समर्पित हमारा।
विश्व विदित विशेष विधान यहां का,
प्रेमिल मन, स्नेहिल धाम यहां का,
गांधी,सुबास, तिलक,खुदी सम पूत,
जन कंठ से गूंजते नाम श्रीराम का।
पुलकित प्रकृति,सुरसरि जल धारा
छोटे नटवर नागर कृष्ण प्यारा।
भरत भूमि भारत देश दुलारा,
सदा रहे शिश समर्पित हमारा ।
चिर प्रशांत,यही चिर अजेय भूमि,
सगुण ब्रह्म,शिव सुरादि प्रिय भूमि
संस्कृति, संस्कार, सुरभित कलियां
आन,मान अभिमान अरमान भूमि।
नत, विश्व विजेता सिकंदर भी हारा
हिमशिखर पर लहराए तिरंगा प्यारा।
भरत भूमि भारत देश दुलारा,
सदा रहे शिश समर्पित हमारा।
कण कण खातिर शत शत सर बलिदान,
नहीं शीश झुकाने का संकल्पित अरमान,
तमन्ना यही, जिएं सदा इसी धरा पर,
निसार मुल्क की खिदमत में मेरी जान।
जन जन का शहीदी परिधान प्यारा,
हवस दिल की शहादत पर रक्त धारा।
भरत भूमि भारत देश दुलारा
सदा रहे शिश समर्पित हमारा।
रिमझिम सावन सा बरसे अहिंसा,
कौमी धुन का कभी नहीं बजना,
गो, सत्य धर्म रक्षक का ही अरमान,
हरि परित्यक्त नारी, राजधर्म जाना।
बहाये पक्षी भी पल पल प्रेम रस धारा,
नमन सर शत शत हिंद धर्म हमारा।
भरत भूमि भारत देश दुलारा
सदा रहे शिश समर्पित हमारा।
सर्वाधिकार सुरक्षित
डा दशरथ तिवारी
सेमरांव, गोपालगंज
बिहार।
841436