भारतवर्ष की साख याद दिला देना
जा रहे हो युद्ध में लड़ने अगर,
शत्रु की चाल से घबराना नहीं,
वीरों! मोह के फ़ंदन में पड़के,
पैर पीछे जरा भी हटाना नहीं।
माया – मोह सभी त्याग करके,
पितु मातु का नाम लजाना नहीं,
लाशें बिछा देना तुम शत्रुओं की
हार का मजा उन्हें चखाना वहीं।
आँख दिखाकर जिसने धमकाया,
उसकी आँखे निकाल कर ले आना,
हर हर महादेव, जय बजरंग बली,
भारत के वीर, तोड़ दुश्मन की नली।
नापाक पाक को नेस्तनामूद कर देना,
भारतवर्ष की साख याद दिला देना,
तिरंगा लहराना है लाहौर करांची में,
इस्लामाबाद में और रावलपिंडी में।
पुलवामा, पहलगाम, मुंबई, दिल्ली
आदि का पूरा बयाना चुका देना है,
आदित्य स्वामी नारायण मंदिर के
अपराधियों को सजाये मौत देना है।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ
स्वरचित/ मौलिक