फुहार: अरविन्द मालवीय

फुहार (कविता )
*अरविन्द मालवीय
बरसता पानी
अच्छा लगता है
ठहरा पानी
ठहरे जीवन सा लगता है
बारिश की ठंडी फुहार तन मन को
हर्षित करती
अति वृष्टि
जन जीवन
अस्त व्यस्त
कर देती है
ताल तलैया खेत सरोवर
सब जल मग्न
मगन मस्त इतराते
नगर निवासी
बाढ़ जलभराव देख
मन ही मन घबराते
छोटे बच्चे
कागज़ की नाव
तैरते हर्षाते
भूरे बादल
पानी लाते
सब जन हर्षाते
भीनी भीनी
ठंडी फुहारें
पाकर
मन पुलकित हो
खुशी मनाता
*अरविन्द मालवीय इलाहाबाद प्रयागराज

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