“नवरात्रि में कन्या पूजन”
यह संस्कृति और परंपरा, है हमारी
नवरात्रि में कन्या पूजन, सभी कराते।
नवदुर्गा में किसी भी दिन, उसके सभी
रूपों को आमंत्रित कर, कन्या भोजन कराते।
कन्या रूपी नवदुर्गा, भोजन ग्रहण कर
आशीष देती,यश बल संपन्नता का, वरदान देती।
जो कलुषित हृदय से, कन्या को देखते
मातारानी उन्हें अपार, कष्ट देती।
कन्या होती मां स्वरूपा,ममता दया
करूणा,अपनी संतानों पर, न्यौछावर करती।
कन्या हो अपनी, चाहे हो दूसरों की
मान-सम्मान, स्नेह,सुरक्षा की कामना करतीं।
कन्या पूजन बाद, उपहार देना होता जरूरी
यथाशक्ति वस्त्र, रूपये,फल आदि का दान करें।
खाली हाथ कन्याओं को,लौटाना होता
अशुभ, मातारानी के क्रोध से सदा बचें।
कन्या दस वर्ष से कम, उम्र की हो
साथ एक बालक हो, नवदुर्गा का सेवक।
कन्याओं के चरण धोकर, आसन पर बिठाएं
भरपेट भोजन कराकर,बने उनके सेवक।
रचयिता
डॉ.मधुकर राव लारोकर, मधुर
नागपुर (महाराष्ट्र)