नवनिधि क्षणिकाएँ: डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”

नवनिधि क्षणिकाएँ—

सिर्फ़ इंसानियत के नाते
कर रहा हूँ सम्मान आपका
लेकिन इसके योग्य नहीं हो।

बिकते हैं सम्मान बाजारों में
ये सही कहा है किसी ने
पैसा फेंको तमाशा देखो।

किस सम्मान के काबिल हूँ मैं
इसका उत्तर आप नहीं जानते
खुशामदी मेरी फितरत में नहीं।

सम्मान झक मारकर नहीं मिलते
खून जलाना पड़ता है साहब
अनुभव के फोड़े सहने पड़ते हैं।

आज मंच पर आमंत्रित है वो
सिर्फ़ स्वार्थ सिद्धि के लिए ही
बेमन सम्मान करना ही होगा।

मेरा सम्मान तुम हो
इस अकारण कृपा के लिए
धन्यवाद हे परमेश्वर।

बिकते, लुटते देखी है इज्ज़त
इतना भी मत गिर जाओ
एक सम्मान के लिए।

— डॉ. रामनाथ साहू “ननकी”
संस्थापक, छंदाचार्य, (बिलासा छंद महालय, छत्तीसगढ़)

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