तितली आई तितली आई,
रंग-बिरंगी सबको भाई।
नीली काली पीली तितली,
होती है मतवाली तितली।
कभी इधर से,
कभी इधर से।
फूलों पर बैठ ठाठ से,
फूलों का रस पीने वाली,
बहारों में है जीने वाली।
उड़ती फिरती डाली डाली,
फूलों की करती रखवाली।
लम्बे लम्बे डंकों वाली,
कोमल कोमल पंखों वाली।
फूलों से करती है बात,
बच्चों के नहीं आती हाथ।
सबके मन को हर्षाने वाली,
बच्चों को तरसाने वाली।
- Home
- Uncategorized
- तितली:
Posted in
Uncategorized
तितली:
You May Also Like
Posted in
Uncategorized
राखी: गार्गी चटर्जी “आशा”
Posted by
साहित्यशाला
Posted in
Uncategorized
तिरंगा झंडा: जलेश्वरी वस्त्रकर
Posted by
साहित्यशाला
Posted in
Uncategorized
वर्जित वेदनायें हो गईँ हैं: श्रीपति रस्तोगी
Posted by
साहित्यशाला