ईमान: पंडित विजय भारद्वाज


पैसा नहीं ईमान कमा कर तो देखिए।
चेहरे पे अपने प्यारी सी मुश्कान देखिए।।

इस काम को करने मे कोई हर्ज नहीं है।
अच्छा है काम आज इसे करके देखिए।।

पैसे का क्या है आदमी हर दिन ही कमाता।
इसको भी एक बार कमा कर तो देखिए।।

बे गैरती से जीना कोई जीना नहीं है।
गैरत के साथ ठाठ से जी कर तो देखिए।।

जलबा जो इसका देखना है देख भी सकते।
पहले मुकाम तक जरा जाकर तो देखिए।।

हासिल अगर ये हो गया इक बात तो तय है।
दुविधा नहीं रहेगी सबको एक देखिए।।

नुकसान एक है कि ये आता है इक दफ़ा।
जाने के बाद चाहे सौ सौगंध कीजिए।।

फल ता है फूल ता है सदाक़त के घरों में।
ईमान बड़ी चीज है हँसकर के लीजिए।।

कीमत नहीं है इसकी बिना मोल का सौदा।
घाटा लगे भले ही ‘विजय’ तुम तो लीजिए।।

   Pandit Vijay Bhardwaj

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