रिश्तों की मर्यादा रखना,
लालच से बचकर रहना।
रिश्ता अनमोल मर्यादा है,
मर्यादा को बचाकर रखना।।
पवित्र प्रेम मर्यादा रखना,
प्यार की पवित्रता मानना।
बड़ों का बहुमान भी करना,
बंधन को तुम बनाए रखना।।
स्नेह संबंध को सींचा करना,
सरस सुगंध से रिश्ता रचना।
मन मधुर को मोहित करना,
ममता की महिमा मान्य रखना।।
त्याग तपस्या को अपनाना,
तृष्णा को अनवरत भगाना।
शांतिपूर्ण हो जीवन संवारना,
रिश्ता मधुर बनाकर रखना।।
स्वरचित
भृगु नाथ प्रसाद “बिराजू”
बलिया,उत्तर प्रदेश