भ्रम पाल लिया है मैंने अपने मन में: गीता राम शर्मा

भ्रम पाल लिया है मैंने अपने मन में ।
कैसा हो मेरा जीवन निश्छल मन में ।
प्रेम बांटकर सदा रहूंगा शायद जीवन में ।
नहीं मौत मुझे आएगी रहूंगा दर्पण में ।

सबके दिलों में राज करूंगा मन में ।
कौन याद करेगा कब तक जीवन में ।
पल में सब मिल जाएगा मिट्टी तन में ।
क्यों याद करेगा कोई तुझको मन में ।

बहुत चिंता करता है तू सबकी मन में ।
कर्म करें हैं बहुत ही इस अच्छे जीवन में ।
कितनी भी भलाई छुपी हैं मेरे मन में ।
सब काम किए हैं अच्छे अपने मन में ।

बहुत टटोला था जब एकांत मिला था ।
कुछ तो गलतियां की हैं हमनें जीवन में ।
उन गलतियों की सजा क्या मिले जीवन में ।
नहीं निर्धारित कर पाया मैं अपने जीवन में । 14226

स्वयं रचित सर्वाधिकार सुरक्षित
गीता राम शर्मा ।।राम।।

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