प्यार का बाज़ार है अज़ीब: डॉ. मीना कुमारी परिहार

प्यार का बाज़ार है अज़ीब
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यारों! प्यार का बाजार भी बड़ा है अज़ीब
नहीं रहा अब इसमें वो तहज़ीब
आज के दौर में या यूं कहें कि
प्यार का बाज़ार अब सज़ने लगे हैं
दिलों के अरमान बिखरने लगे हैं
आधुनिकता की की दौड़ में
प्यार मोहब्बत बिकने लगे हैं
दिल से दिल के रिश्ते टूटने लगे हैं
ये कैसी रीत है आई
जहां प्यार ,मोहब्बत की मोल है लगाई
प्यार अब दिल से नहीं जिस्म से है होता
एक वह भी समय था जब प्यार
चिट्ठियों में इजहार होता था
आज आई लव यू लिखकर होता है
उन चिट्ठियों में एक अजीब सी
कशिश होती थी जिसे पढ़ने को दिल बेचैन हो उठता था
वो कशिश आज कहां है मिलती
आंखों से आंखों में झांक कर
सच्चे प्यार का इजहार हो जाया करता था
आज डेट्स और पैसों से होता है प्यार का कारोबार
अब तो जिंदगी प्यार का बाजार हो गए हैं
प्यार के इस बाजार में हुस्न के सभी दीवाने बने हैं
मतलबी हो गई है यह दुनियाँ
ढाई अक्षर प्रेम का किसने है समझा
सच्चा प्यार तो दिल से होता है
इसे कोई दिखावा की जरूरत नहीं होती
ये बात कोई समझता ही नहीं
सच्चा प्यार बाजार में नहीं मिलता भाग्य से मिलते हैं सच्चे प्रेमी और प्रेमिका,उनका सच्चा प्यार
हाय री, दुनियाँ तू कहां से कहां आ गई है

डॉ मीना कुमारी परिहार

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