पहलगाम में कुछ बडा किया होगा ।
आतंकी धर्म को छोटा कर गया होगा ।।
उसे लगा होगा दुनिया को हिला दिया
अब देश के डर से कहीं छुप गया होगा ।।
भारत माँ की धरतीको लहू लुहान कर दिया
देश के जबाजो परिणाम पता किया होगा ।।
अभी देख रहे पाप कब बडा होगा
दुर्गा दुर्गति नाशिनी माॅ खंजर सीने पर चला होगा ।।
जिसने शौर मचाया दहशत के लिए
वह भी जनाजे में कफन बांध लिया होगा ।।
पता नहीं कब मयस्सर होगा दो गज जमीन
देश की गोलियों से अबतक छलनी हो गया होगा ।।
ढूंढ निकालेगे जबाज जवान तुम्हे
देश के गर्जन से खुद डर गया होगा ।।
कभी पाक कुरान पढना सीख लिए होते
वह दहशत के साए में जिया होगा ।।
नूर की हुर मन में सपने दिखा कर
कुरान से दूर अब जहन्नुम में गया होगा ।।
(स्वरचित मौलिक रचना)
डॉ भारतेन्द्र सिंह
महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय गोरखपुर उ प्र
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पहलगाम: डॉ भारतेन्द्र सिंह
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