नशामुक्त भारत का कब पूरा होगा सपना।
हर किसी का नशा है अपना
अपना।।
किसी को प्यार का तो किसी को अपने काम का ।
किसी को नशा होने बदनाम का।।
तुम भी लाइन में और सभी लाइन में।
खड़े हैं अपनी अपनी पसंद नशे की दुकान में।।
एक बोतल के साथ एक फ्री बेचते हैं।
हम बड़े शौक से उसे खरीद कर खुश होते हैं।।
न इनकी सुनी और न उनकी सुनी
है।
खरीदने पहुंच जाते जहां दुकान खुली है।।
साथ में चकला भी मुफ्त मिल जाता।
तो पीने का मजा और अधिक हो जाता।।
न इसका इंतजार और न उसका इंतजार करता।
मनोरंजन अकेले अकेले मैं करता।।
गर मिल जाता मुफ्त तंबाकू और
सिगरेट की डिब्बी तो
सोडा की बोतल खुद लाकर गिलास में भरता ।
बंद कमरे में , खुले बरामदे या फिर किसी होटल में पीओ,
डरना मना है कहां कोई किसी से डरता ।।
नशामुक्त भारत का कब पूरा होगा सपना।
हर किसी का नशा है अपना
अपना।।
सपना नशा मुक्ति का करना जरूरी।
समझ अपनी – अपनी नहीं किसी की मजबूरी।।
नशीले सामान हैं सामाजिक बहुत बुरी बुराई।
इसे छोड़ने में ही है सभी की भलाई।।
प्रचलन नशे का बहुत हो रहा है।
सारा वहाव इसी ओर हो रहा है।।
इसके चलते -चलते अनेकों घर बिखर रहे हैं।
चिंता इसकी न कोई कर रहे हैं।।
नशामुक्त भारत का कब पूरा होगा सपना।
हर किसी का नशा है अपना
अपना।।
हरि प्रकाश गुप्ता सरल
भिलाई छत्तीसगढ़